नवग्रह के दान- Navgrah ke Daan

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ज्योतिषशास्त्र में ग्रहो का अनुकुल्य – प्राप्ति हेतु विभिन्न प्रकार के दान बताये गये है ।  ग्रहों के भिन्न – भिन्न प्रकार के दान कहे गये है, जो संक्षेप में निम्न प्रकार से है –

1. सूर्य – सूर्य सभी ग्रहो का राजा है एवं सभी ग्रहो में बली है, किन्तु यदि मनुष्य की जन्मकुण्डली में सूर्य प्रतिकूल स्थिति में हो तो ‘धेनु‘ का दान करना चाहिये ।  ‘संहिताप्रदीप‘ ग्रन्थ के अनुसार सूर्य हेतु ‘ताम्बुल‘ का दान करना चाहिये ।  दान चन्द्रिका ग्रन्थ में उद्घृत ‘ज्योतिःसार‘ ग्रन्थ में बताया गया है कि सूर्य हेतु लाल – पीले रंग से मिश्रित वर्ण का वस्त्र, गुड़, स्वर्ण, ताम्र, माणिक्य, गेहूं, लाल कमल, सवत्सा गौ तथा मसूर की दाल का दान करना चाहिये, यथा –

कौसुम्भवस्त्रं गुडहेमताम्रंमाणिक्यगोधूमसुवर्णपद्म ।
सवत्सगोदानमिति प्रणीतं दुष्टायं सूर्याय मसूरिकाश्च ।।

2. चन्द्रमा – चन्द्रमा की अनुकूलता के लिये श्रीखण्ड चन्दन का दान करना चाहिसे ।  चन्द्रमा की प्रीति के लिये घृत कलश, श्वेत वस्त्र, दही, शंख, मोती, स्वर्ण तथा चंादी का दान करना चाहिये । यथा –

घृतकलशं सितवस्त्रं दधिशडंख मौक्तिकं सुवर्ण च ।
रजतं च प्रदद्याच्चन्द्रारिष्टोपशान्तये त्वरितम् ।।

3. मंगल – मंगल ग्रह की शान्ति के लिये लाल पुष्प एवं ब्राह्मण को भोजन दान देनाचाहिये । मूंगा, गेहूं मसूर की दाल, लाल वर्ण का बैल, कनेर पुष्प, लाल वस्त्र, गुड़, स्वर्ण, ताम एवं रक्त – चंदन का दान करने मंगल का दोष नष्ट होता है –

प्रवालगोधूममसूरिकाश्चवृषं सताम्रं करवीरपुष्पम् ।
आरक्तवस्त्रं गुडहेमताम्रं दुष्टाय भौमाय च रक्तचन्दनम् ।।

4. बुध – जन्मकुण्डली में यदि बुध की स्थिती ठीक नहीं हो तो स्वंण एवं पुष्पदान करना चाहिये ।  बुध की प्रीति के लिये नीला वस्त्र, मूंग, स्वर्ण, पन्ना, दासी, स्वर्णयुक्त घी, कास्ंय (कांसा धातु), हाथी दांत, भेड़, धन, धान्य, पुष्प, फल, लता का दान करना चाहिये –

नीलं वस्त्रं मुद्गहैमं बुधायरत्नं पाचिं दासिकां हेमसर्पिः ।
कांस्यं दन्तं कु´रस्याथ मेषोरौप्यं सस्यं पुष्पजात्यादिकं च ।।

5. गुरू – गुरूग्रह को शान्ति के लिये अश्व, स्वर्ण, मधु (शहद), पीला वस्त्र, पीला धान्य जैसे – धान, चने की दाल इत्यादि, नमक, पुष्प (पीला), शर्करा तथा हल्दी (पुस्तक, पुखराज रत्न, भूमि एवं छत्र) का दान करना चाहिये यथा –

अश्वः सुवर्ण मधुपीतवस्त्रंसपीतधान्यं लवणं सपुष्पम् ।
सशर्करं तद्रजनीप्रयुक्तंदुष्टाय शान्त्यै गुरवे प्रणीतम् ।।

6. शुक्र – शुक्र ग्रह का दोष निवारण करने हेतु अश्व एवं श्वेत वस्त्र का दान करना चाहिये । चित्रित सुन्दर वस्त्र, चावल, घी, स्वर्ण, धन, हीरा, सुगन्धित दिव्य पदार्थ तथा श्रृंगार – सामग्री एवं सवत्सा श्वेत गौर (स्फटिक, कपूर, शर्करा, मिश्री, एवं दही इत्यादि) का दान करना चाहिये –

चित्रवस्त्रमपि दानवार्चितेदुष्टगे मुनिवरैः प्रणोदितम् ।
तण्डुलं घृतसुवर्णरूप्यकं वज्रकं परिमलो धवला गौः ।।

7. शनि – जन्मपत्रिका में यदि शनि की स्थिती यदि शुभफलदात्री न हो तो काले वर्ण की गाय एवं तैल का दान करना चाहिये ।  शनि दोष कीशान्ति हेतु नीलम, भैंसा, काला वस्त्र, लोहा तथा जटा नारियल (उड़द, तिल, छाता, जूता एवं कम्बल) का दान दक्षिणा के साथ करना चाहिये । यथा –

नीलकं महिषं वस्त्रं कृष्णं लौहं सदक्षिणम् ।
विश्वामित्रपियं दद्याच्छनिदुष्टप्रशान्तये ।।

8. राहु – राहु ग्रह के दोष निवारण हेतु बहूमूल्य खड़ग् (तलवार) का दान करना चाहिये । काली भेड़, गोमेद, लोहा, कम्बल, सोने का नाग, तिल पूर्ण ताम्र पात्र का दान करने से राहुजनित दोष शांत होते है –

राहोर्दानं कृष्णमेषो गोमेदों लौह कम्बलौ ।
सोवर्ण नागरूपं च सतिलं ताम्रभाजनम् ।।

9. केतु – जन्मकुण्डली के अनुसार यदि केतु ग्रह दोषकारक हो तो छाग (बकरी) का दान करना चाहिये ।  केतु ग्रह की प्रीति के लिये स्वच्द वैदूर्य (लहसुनिया), तैल, कस्तूरी, तिलयुक्त ऊनी वस्त्र (कम्बल, लोहा, छाता एवं उड़द) का दान करना चाहिये –

केतोर्वैदूर्यममलं तैलं मृगमदं तथा ।
ऊर्णास्तिलैस्तु संयुक्तां दद्यात्क्लेशानुपत्तये ।।

इस प्रकार से नवग्रहो हेतु विशिष्ट दान शास्त्रों में बताये गये हैं ।  पंचाग आदि में भी नवग्रह दान की सारणी दी हुई रहती है ।  योग्य दैवज्ञ के परामर्श से कार्य सम्पन्न करना चाहिये ।  दान देते समय उसके साथ दक्षिणा भी अवश्य देनी चाहिये – ऐसा शास्त्रों में बताया गया है ।  नवग्रहों के निमित्त दान सामान्यतया उस ग्रह के वार को किया जाता है यथा – सूर्य हेतु दान रविवार को, चन्द्र हेतु दान सोमवार को, मंगल का दान मंगल वार को, बुध का दान बुधवार को इत्यादि

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About the Author: Pushti Mimansa