लू से बचने के उपाय – Ways to Avoid Sunstroke

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भारतवर्ष के अधिकांश राज्यों में ग्रीष्म ऋतु का प्रभाव अधिक रहता है। मुख्यतः राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा एवं दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में ग्रीष्म ऋतु का प्रभाव सर्वाधिक रहता है। यहां मार्च के अन्त से अगस्त माह तक तेज गर्मी पड़ती है। गर्मी के मौसम में बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिनमें मुख्यतः लू लगना, सिरदर्द होना, उल्टियां होना, पेट में मरोड़ आकर दस्त लगना आदि प्रमुख हैं।लू के लक्षणः गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा तकलीफ लू लगने से होती है। इसमें तेज बुखार आना, बुखार में पसीना नहीं आता है, सिर दर्द करना, भूख नहीं लगती है, उल्टी व दस्त भी हो सकते हैं। हमारे शरीर की त्वचा सूखी पसीने रहित हो जाती है। शरीर में कमजोरी, देखने की ताकत कम होने लगती है, सांस लेने में तकलीफ होना, बार-बार पेशाब होना, कभी-कभी तो मल-मूत्र का स्त्राव भी रुक जाता है।

लू के घरेलू उपचारः

  • सर्वप्रथम रोगी के शरीर पर ठण्डे पानी में सूती कपड़ा भिगोकर डालें।
  • इस बीमारी से बचने के लिए प्रतिदिन 5-7 लीटर पानी पीना चाहिए।
  • ताजे फल, तरबूज, ककड़ी, खीरा जैसी हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिये।
  • नींबू पानी, कैरी का शरबत, इमलानी, ठण्डाई, बील का शरबत जैसे पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिये।
  • बच्चों को धूप में जाने से पहले 1-2 गिलास पानी पिलाकर भेजना चाहिये।
  • सिर को सूती कपड़े से ढककर या छतरी लेकर धूप में निकलना चाहिए

होम्योपैथिक उपचारः

  • तेज प्रलाप होने पर बेलेडोना, स्ट्रामोनियम दवाई का प्रयोग करना चाहिए।
  • गर्मी में दस्त होने पर फेरम-फास का प्रयोग करें।
  • तेज गर्मी से फेफड़ों में सांस नहीं आने पर लेकेसिस, बेहोशी जैसी सुस्ती आने पर ऐगेरिकस, त्वचा काली पड़ने पर के-थारिस नामक दवा का प्रयोग करना चाहिए।
  • गर्मी से सीधी तरफ (Right Side) का सरदर्द होने पर सेगुनेरिया, आगे की तरफ का सरदर्द होने पर स्ट्रामोनियम, मिर्गी के जैसे लक्षण  होने पर बेलेडोना नामक दवा का प्रयोग करना चाहिए।

नोटः यह सभी होम्योपैथिक दवाईयाँ होम्योपैथिक चिकित्सक की देखरेख में ही प्रयोग करें।

-डाॅ. ओमप्रकाश शर्मा

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About the Author: Pushti Mimansa